चक्रीय चतुर्भुज का परिभाषा, फार्मूला एवं गुण | Chakriya Chaturbhuj

Chakriya Chaturbhuj

Chakriya Chaturbhuj एक ऐसा चतुर्भुज है, जिसके सभी भुजाएँ एक वृत्त पर स्थिर होते हैं. अर्थात, वह घेरा जिसके परिमाप पर किसी भी बहुभुज के सभी शीर्ष स्थिर हो, वह परिधि वाले वृत्त के रूप में परिभाषित होते है.

सामान्य रूप से, चतुर्भुज एक 4 भुजाओं वाला बहुभुज है जो 4 परिमित रेखा खंडों से घिरा होता है. जैसा की आप जानते है कि चतुर्भुज शब्द की उत्त्पति दो लैटिन शब्दों से मिलकर बना है, जिसमे “Quadri” का अर्थ “चार” और “Latus” का अर्थ “भुजा” है.

यदि किसी चतुर्भुज के सभी भुजाएँ किसी वृत्त की परिमाप पर स्थित हो, तो उसे चक्रीय चतुर्भुज के अंतर्गत परिभाषति किया जाता है. फार्मूला, गुणधर्म एवं परिभाषा के दृष्टिकोण से Chakriya Chaturbhuj सबसे महत्वपूर्ण टॉपिक है. अतः इसे याद करना अत्यंत आवश्यक है.

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चक्रीय चतुर्भुज किसे कहते है | Chakriya Chaturbhuj Paribhasha

सरल शब्दों में, चक्रीय चतुर्भुज एक ऐसा चतुर्भुज है जिसके चारों शीर्ष वृत्त की परिधि यानि परिमाप पर स्थिर होते हैं. चतुर्भुज के चारों भुजाएँ वृत्त के अन्दर होती हैं तथा उनके शीर्ष वृत्त कि परिमाप को छू रहे होते हैं, उसे चक्रीय चतुभुज कहा जाता है.

यूक्लिडियन समतल ज्यामिति में, चक्रीय चतुर्भुज एक ऐसा बहुभुज है जिसमें चार भुजा, चार शीर्ष एवं चार कोण होते हैं, तथा आंतरिक कोणों का योग 360° होता है. चक्रीय चतुर्भुज के विपरीत कोणों का योग 180° होता है.

  • ∠A + ∠B + ∠C + ∠D= 360° 
  • ∠A + ∠C = 180° 
  • ∠B + ∠D = 180°

चक्रीय चतुर्भुज का फार्मूला | Chakriya Chaturbhuj Formula

किसी भी ज्यामितीय आकृति के द्वि-विमीय आकार के परिणाम को क्षेत्रफल कहा जाता है. चतुर्भुज के प्रकार में से सबसे अधिक महत्वपूर्ण Chakriya Chaturbhuj के फार्मूला है. क्योंकि यह किसी भी एग्जाम ( कम्पटीशन ) का मुख्य केंद्र होता है. अर्थात, प्रश्नों की संख्या इस टॉपिक से अधिक होता है.

चक्रीय चतुर्भुज का क्षेत्रफल

किसी भी वृत्त के अन्दर घिरे चतुर्भुज का क्षेत्रफल ज्ञात करने के लिए निम्न फार्मूला का प्रयोग किया जाता है.

क्षेत्रफल = √[s(s-a) (s-b) (s – c) (s – c)]

जहाँ a,b,c और d चक्रीय चतुर्भुज के भुजा है.

परिमाप, S = ½ ( a + b + c + d )

Note:
इस चतुर्भुज में हेरोन के फार्मूला का प्रयोग करने के लिए अर्द्ध परिमाप निकलना आवश्यक होता है.

चक्रीय चतुर्भुज का गुणधर्म

  • चक्रीय चतुर्भुज में, विपरीत कोणों का योग 180 है.
  • बाहरी कोण का माप विपरीत आंतरिक कोण के माप के बराबर होता है।
  • यदि किसी चतुर्भुज के दो विपरीत कोणों का योग पूरक है, तो वह एक चक्रीय चतुर्भुज होगा.
  • किसी वृत्त में स्थिर चतुर्भुज के विकर्णों का गुणन इसके विपरीत पक्षों के दोनों युग्मों के गुणनफल के बराबर होता है.
  • एक वृत्त में चक्रीय चतुर्भुज के चारों शीर्ष वृत्त की परिधि पर स्थित होते है.
  • चक्रीय चतुर्भुज में एक आयत या एक समांतर चतुर्भुज प्राप्त करने के लिए, भुजाओं के मध्यबिंदुओं को एक क्रम में रेखांचित करना होता है.
  • यदि वह चक्रीय चतुर्भुज है, तो लंबवत द्विभाजक समवर्ती अनिवार्य होगा.

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चक्रीय चतुर्भुज से सम्बंधित महत्वपूर्ण तथ्य

कोई भी वर्ग, आयत, समलम्ब, समनांतर चतुर्भुज आदि चक्रीय चतुर्भुज है. यदि और केवल यदि उसके सभी शीर्ष वृत्त के परिमाप को स्पर्श करते हो. विद्यार्थी ऐसे आकृति में कंफ्यूज हो जाते है. इसलिए, उनके कांसेप्ट क्लियर करने के लिए Chakriya Chaturbhuj से सम्बंधित सभी आवश्यक पहलू को यहाँ उपलब्ध कराया गया है.


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