प्रकृति पर कविता | प्रकृति और मानव पर कविता

प्रकृति पर छोटी कविता: प्रकृति मानव जीवन के लिए मां के समान है. क्योंकि, प्रकृति के बिना जीवन की कल्पना नही की जा सकती है. प्रकृति हमें जीवन यापन करने के लिए बहुत सारे संसाधन उपलब्ध करवाती है, जिसका उपयोग कर मनुष्य जीवन सरल और सुखमय बनते हैं. Poem on Nature in Hindi के माध्यम से चंद लाइन प्रकृति को समर्पित है.

प्रकृति मनुष्य को शुद्ध हवा, शुद्ध जल, शुद्ध भोजन,बिज, तरल पदार्थ, फल, एवं अन्य प्राकृतिक संसाधन उपहार में देती हैं जिससे मानव जीवन बहुत सरल हो जाता है. 

पर अफसोस इस बात की है कि मनुष्य अपने स्वार्थ के लिए प्रकृति का गलत इस्तेमाल करते हैं. उसके संसाधन को बिना जरूरत बर्बाद करते हैं जिसके परिणाम स्वरूप पृथ्वी पर भयंकर महामारी उत्पन्न होती है जिसका असर संपूर्ण पृथ्वी पर होता है. 

यह सभी प्रकृति के ही प्रकोप है जो आज पूरे मनुष्य जाति पर भयंकर खतरा मंडरा रहा है जिसका मुख्य वजह प्रकृतिक संसाधन का गलत उपयोग करना है. 

प्रकृति का महत्व समझने के लिए यहां प्रकृति पर प्रसिद्ध कविता “Hindi Poems on Nature” मुहैया कराया जा रहा है. जो वास्तव में प्रकृति पर कविता के माध्यम से आवश्यक विचारधारा आपके सामने प्रस्तुत करेगा और यह सुनिश्चित भी कराएगा कि पृथ्वी पर जीवन यापन करने के लिए प्रकृति यानि Prakriti kavita कितना महत्वपूर्ण है.

प्रकृति पर कविताएँ | Prakriti Poem in Hindi

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संसार की खूबसूरती प्रकृति है और मनुष्य जीवन भी प्रकृति से ही संभव है. प्रकृति का महत्व समझाने के लिए प्रकृति पर कविता यानि प्रकृति और मनुष्य पर कविता उपलब्ध है. जिसका उपयोग प्रकृति दिवस पर कविता के रूप में कर सकते है.

प्रकृति पर कविता – हरे पेड़ पर चली कुल्हाड़ी

हरे पेड़ पर चली कुल्हाड़ी धूप रही ना याद।
मूल्य समय का जाना हमनेखो देने के बाद।।

खूब फसल खेतों से ले ली डाल डाल कर खाद।
पैसों के लालच में कर दी उर्वरता बर्बाद।।

दूर दूर तक बसी बस्तियाँ नगर हुए आबाद।
बन्द हुआ अब तो जंगल से मानव का संवाद।।

ताल तलैया सब सूखे हैं हुई नदी में गाद।
पानी के कारण होते हैं हर दिन नए विवाद।।

पशु पक्षी बेघर फिरते हैं कौन सुने फरियाद।
कुदरत के दोहन ने सबके मन में भरा विषाद।।

Author:- सुरेश चन्द्र

अगर पेड़ भी चलते होते | Best Poems on Nature in Hindi

अगर पेड़ भी चलते होते,  कविता के माध्यम से प्रकृति के अनुपम सुंदरता के बारे में वर्णन किया गया है जो दर्शाता है कि प्रकृति अपनी गोद में  ब्रह्मांड की सभी खूबसूरती अपने गोद में छिपाए बैठी है. कवी का भाव प्रकृति पर कविता में प्रकृतिक सुंदरता का आनंद उठाना और उसमें विलीन हो जाना है. 

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प्रकृतिक कविताएं हमेशा एक नई दिशा प्रदान करती है जिससे हम सभी प्रकृति की रक्षा कर सकें और आने वाले भयंकर सकट से आसानी से मुक्ति पा सके.यहां एक और पप्राकृत पर खूबसूरत कविता दिया गया है जो आपको पसंद आएगा.

अगर पेड़ भी चलते होते कितने मजे हमारे होते।
जहां कहीं भी धूप सताती उसके नीचे बैठ सुस्ताते।।

बांध तने में उसके रस्सी चाहे जहां कहीं ले जाते।
लगती जब भी भूख अचानक तोड़ मधुर फल उसके खाते।।

आती कीचड़ बाढ़ कहीं तो झट उसके ऊपर चढ़ जाते।
जब कभी वर्षा हो जाती उसके नीचे हम छिप जाते।।

अगर पेड़ भी चलते होते।
कितने मजे हमारे होते।।

प्रकृति पर कविता, प्रकृति की सुरक्षा क्यों जरुरी है?

प्राकृतिक संसाधन के बिना पृथ्वी पर जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है क्योंकि प्रकृति सुखी एवं स्वस्थ जीवन के साथ-साथ खूबसूरत और शांत वातावरण उपलब्ध कराती है  जो जीवन के अनुकूल हो, समय के साथ सुंदर फल-फूल, अद्भुत पशु-पक्षी, हितकारी जड़ी-बूटियां, जंगल, पत्थर, पहाड़, नदी ,हिमालय, पर्वत आदि भी जीवन के अनुरूप होता है.

प्रकृति ब्रह्मांड का सबसे खूबसूरत तोहफा है जो पूरे कायनात को समय के अनुसार गति मान रखता है इसलिए हमारा कर्तव्य प्रकृति का नुकशान पहुंचाना नहीं बल्कि इसकी रक्षा करना है.

कवी का मूल उद्देश्य  प्रकृतिक संसाधनों का दुरुपयोग करने से बचाना है एवं सबको जागृति करना है प्रकृति हमारा हमारा है और हम इसके मालिक हैं और इसकी सुरक्षा मेंरी भी ज़िम्मेदारी है. कवी का भाव इस कविता में निहित है.

कलयुग में अपराध का बढ़ा अब इतना प्रकोप।
आज फिर से काँप उठी देखो धरती माता की कोख।।

समय समय पर प्रकृति देती रही कोई न कोई चोट।
लालच में इतना अँधा हुआ मानव को नही रहा कोई खौफ।।

कही बाढ़, कही पर सूखा कभी महामारी का प्रकोप।
यदा कदा धरती हिलती फिर भूकम्प से मरते बे मौत।।

मंदिर मस्जिद और गुरूद्वारे चढ़ गए भेट राजनितिक के लोभ।
वन सम्पदा, नदी पहाड़, झरने इनको मिटा रहा इंसान हर रोज।।

सबको अपनी चाह लगी है नहीं रहा प्रकृति का अब शौक।
“धर्म” करे जब बाते जनमानस की दुनिया वालो को लगता है जोक।।

कलयुग में अपराध का बढ़ा अब इतना प्रकोप।
आज फिर से काँप उठी देखो धरती माता की कोख।।

हरियाली की चूनर ओढ़े।
यौवन का श्रृंगार किए।।

वन-वन डोले, उपवन डोले।
वर्षा की फुहार लिए।।

कभी इतराती, कभी बलखाती।
मौसम की बहार लिए।।

स्वर्ण रश्मि के गहने पहने।
होंठो पर मुस्कान लिए।।

आई है प्रकृति धरती पर।
अनुपम सौन्दर्य का उपहार लिए।।

Hindi Poems on Nature यानि प्रकृति पर कविता आप सभी को कैसा लगा, हमें कमेंट करने अपना कीमती विचार अवश्य दे. धन्यवाद !!

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