महिलाओं पर कविताएँ | Famous Poem on Women in Hindi

Poem on Women in Hindi

महिलाओं का देश की उन्नति में 20 वी सदी से ही एक बड़ा योगदान रहा है जो 21वी सदी में भी बढ़ता जा रहा है. आज प्रत्येक क्षेत्र में महिलाओं का योगदान का दायरा दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है. नारी यानि महिलाऐं केवल घर के ही शान नही होती बल्कि देश की शान होती है जो लगातार सिद्ध करती जा रही है.

भारत में प्राचीन काल से ही महिलाओं को देश, समाज, घर, परिवार आदि का आधार माना जाता है जिसे सम्पूर्ण एवं समृद्ध बनाने के लिए ये अपनी इच्छाओं त्याग करती है.

21 वी सदी में महिलाओं के प्रति समाज का दृष्टिकोण बदल रहा है और वो इन्ही अपना अस्तित्व देख रहे है जो वास्तव में कल्याणकारी है.

महिलाओं शिक्षित कर केवल परिवार एवं समाज को ही समृद्ध नही बनाया जा सकता है बल्कि देश को भी एक शक्तिशाली एवं विकाशील राष्ट्र बनाया जा सकता है. महिलाऐं अपने आप को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भी साबित कर चुकी है कि वे किसी दुसरें से कम नही है.

समाज की दृष्टिकोण बदलने के लिए महान लेखकों ने महिलाओं की शक्तियों कविताओं के माध्यम से उनका वर्णन किया है जो काबिले तारीफ है. हालांकि उनकी गाथाओं को शब्दों में नही पिरोया जा सकता है लेकिन लेखकों ने काफी हद तक उनका गुणगान महिला कविता के माध्यम से किया है जो पढ़ने योग्य है.

5 लोकप्रिय महिलाओं पर कविता | Hindi Poem on Women

आधुनिक नारी – महिला कविता

मै अबला नादान नहीं हूँ, दबी हुई पहचान नहीं हूँ।
मै स्वाभिमान से जीती हूँ,
रखती अंदर ख़ुद्दारी हूँ।।

मै आधुनिक नारी हूँ।।

पुरुष प्रधान जगत में मैंने, अपना लोहा मनवाया।
जो काम मर्द करते आये, हर काम वो करके दिखलाया
मै आज स्वर्णिम अतीत सदृश, फिर से पुरुषों पर भारी हूँ
मैं आधुनिक नारी हूँ।।

मैं सीमा से हिमालय तक हूँ, औऱ खेल मैदानों तक हूँ।
मै माता,बहन और पुत्री हूँ, मैं लेखक और कवयित्री हूँ
अपने भुजबल से जीती हूँ, बिजनेस लेडी, व्यापारी हूँ
मैं आधुनिक नारी हूँ।।

जिस युग में दोनो नर-नारी, कदम मिला चलते होंगे
मै उस भविष्य स्वर्णिम युग की, एक आशा की चिंगारी हूँ
मैं आधुनिक नारी हूँ।।

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बहन पर खुबसूरत कविता

Author — रणदीप चौधरी

महिला शशक्तिकरण पर कविता

जितना घिसती हूं , उतना निखरती हूं।
परमेश्वर ने बनाया है मुझको , कुछ अलग ही मिट्टी से।।

जैसा सांचा मिलता है, उसी में ढल जाती हूं।
कभी मोम बनकर, मैं पिघलती हूं।।

तो कभी दिए की जोत, बनकर जलती हूं।
कर देती हूं रोशन ।।

उन राहों को, जो जि‍द में रहती हैं ।
खुद को अंधकार में रखने की।।

पत्थर बन जाती हूं कभी, कि बना दूं पारस ।
मैं किसी अपने को, रहती हूं खुद ठोकरों में पर।।

बना जाती हूं मंदि‍र कभी, सुनसान जंगलों में भी।
हूं मैं एक फूल सी, जिस बिन, ईश्वर की पूजा अधूरी,
हर घर की बगिया अधूरी।।

बेटी पर लोकप्रिय कविताएँ जो गर्व से सर ऊँचा कर देगा

Author – Tarasem kaur

नारी पर विशेष कविता – शैलेन्द्र कुमार सिंह चौहान

आया समय, उठो तुम नारी।
युग निर्माण तुम्हें करना है।।

आजादी की खुदी नींव में।
तुम्हें प्रगति पत्थर भरना है।।

अपने को, कमजोर न समझो।
जननी हो सम्पूर्ण जगत की, गौरव हो।।

अपनी संस्कृति की, आहट हो स्वर्णिम आगत की।
तुम्हे नया इतिहास देश का, अपने कर्मो से रचना है।।

दुर्गा हो तुम, लक्ष्मी हो तुम।
सरस्वती हो सीता हो तुम।।

सत्य मार्ग, दिखलाने वाली, रामायण हो गीता हो तुम।
रूढ़ि विवशताओं के बन्धन, तोड़ तुम्हें आगे बढ़ना है।।

साहस , त्याग, दया ममता की, तुम प्रतीक हो अवतारी हो।
वक्त पड़े तो, लक्ष्मीबाई, वक्त पड़े तो झलकारी हो,
आँधी हो तूफान घिरा हो, पथ पर कभी नहीं रूकना है।।

शिक्षा हो या अर्थ जगत हो या सेवाये हों।
सरकारी पुरूषों के समान तुम भी हो।।

हर पद की सच्ची अधिकारी।
तुम्हें नये प्रतिमान सृजन के अपने हाथों से गढ़ना है।।

माँ पर खूबसूरत कविता माँ के बिना जीवन अधुरा है

Author – Shailendra kumar singh Chauhan

नारी तेरे रूप अनेक – कविता

नारी तेरे रूप अनेक, सभी युगों और कालों में है तेरी शक्ति का उल्लेख ।
ना पुरुषों के जैसी तू है ना पुरुषों से तू कम है।।

स्नेह,प्रेम करुणा का सागर शक्ति और ममता का गागर ।
तुझमें सिमटे कितने गम है।।

गर कथा तेरी रोचक है तो तेरी व्यथा से आंखे नम है।
मिट-मिट हर बार संवरती है।।

खुद की ही साख बचाने को हर बार तू खुद से लड़ती है।
आंखों में जितनी शर्म लिए हर कार्य में उतनी ही दृढ़ता।।

नारी का सम्मान करो ना आंकों उनकी क्षमता।
खासतौर पर पुरुषों को क्यों बार बार कहना पड़ता।।

हे नारी तुझे ना बतलाया कोई तुझको ना सिखलाया।
पुरुषों को तूने जो मान दिया हालात कभी भी कैसे हों।।

तुम पुरुषों का सम्मान करो नारी का धर्म बताकर ये ।
नारी का कर्म भी मान लिया औरत सृष्टि की जननी है ।।

श्रृष्टि की तू ही निर्माता हर रूप में देखा है तुझको ।
हर युग की कथनी करनी है युगों युगों से नारी को ।।

बलिदान बताकर रखा है तू कोमल है कमजोर नहीं ।
पर तेरा ही तुझ पर जोर नहीं तू अबला और नादान नहीं ।।

कोई दबी हुई पहचान नहीं है तेरी अपनी अमिटछाप ।
अब कभी ना करना तू विलाप चुना है वर्ष का एक दिन ।।

नारी को सम्मान दिलाने का अभियान चलाकर रखा है ।
बैनर और भाषण एक दिन का जलसा और तोहफा एक दिन का ।।

हम शोर मचाकर बता रहे हम भीड़ जमाकर जता रहे ।
ये नारी तेरा एक दिन का सम्मान बचाकर रखा है ।।

मैं नारी हूं है गर्व मुझे ना चाहिए कोई पर्व मुझे ।
संकल्प करो कुछ ऐसा कि अब सम्मान मिले हर नारी को,
बंदिश और जुल्म से मुक्त हो वो अपनी वो खुद अधिकारी हो।।

पापा पर लोकप्रिय कविता

Author – प्रतिभा तिवारी

सक्षम है बलधारी है – कविता

सजग, सचेत, सबल, समर्थ, आधुनिक युग की नारी है।
मत मानो अब अबला उसको , सक्षम है बलधारी है।।

बीत गई वो कल की बेला जीती थी वो घुट घुट कर।
कुछ न कहती , सब कुछ सहती पीती आंसू छुप छुप कर।।

आज बनी युग की निर्माता, हर बाधा उस से हारी है।
चारदीवारी का हर बन्धन तोड़ के बाहर आई है।।

घर, समाज और देश में उसने अपनी जगह बनाई है।
ऊंचे ऊंचे पद पर बैठी, सम्मान की वो अधिकारी है।।

मत समझो निर्बल बेबस, लाचार आज की नारी है ।
नर की प्रबल प्रेरणा का आधार आज की नारी है ।।

स्नेह, प्रेम व ममता का भन्डार आज की नारी है ।
हर जंग जीते शान से यह, अभियान अभी भी जारी है।।

Author – हरीश नारंग

Conclusion

Poem on Women in Hindi में महिलाओं की व्याख्या विस्तार से किया गया है कि उनकी स्थिति आज क्या है और वो क्या कर सकती है. समाज का अगर दृष्टिकोण बदल जाए तो महिलाओं का अस्तित्व देश के प्रत्येक क्षेत्र में अग्रणी होगा. यह सिर्फ मेरा दृष्टिकोण नही है बल्कि भारत सरकार के आंकड़े कहते है. इसलिए खुद जागरूक हो और साथ ही महिलाओं को भी जागरूक करे.


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